2025 तक भारतीय बाजार में उतरने के लिए तैय्यार स्वच्छ मांस
अमानवीय और असुरक्षित मांस उद्योग का मुकाबला करने के प्रयास में, वैज्ञानिक दुनिया भर के बाजारों में स्वच्छ मांस, या "हिंसारहित मांस" लाने के लिए काम कर रहे हैं।

द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, ह्युमन सोसाइटी इंटरनेशनल (एचएसआई), भारत और हैदराबाद स्थित सेल्यूलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र, भारतीय बाजार में स्वच्छ मांस लाने के लिए प्रौद्योगिकी और विकास को बढ़ावा देने के लिए साथ आ रहा है। एचएसआई इंडिया के उप निदेशक, अलोकप्रणा सेनगुप्ता का कहना है, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, स्वच्छ मांस 2018 के अंत तक बाजार में आने का अनुमान लगाया जा रहा है।" "हम 2025 तक भारत में इसके उपलब्ध होने की उम्मीद करते हैं।"

विश्व स्तर पर उत्पादन बढ़ने से, स्वच्छ मांस की लागत में कमी आएगी और अधिक से अधिक लोग इसे खरीद सकेंगे।

हफ़िंगटन पोस्ट में, एचएसआई इंडिया के हवाले से लिखा गया है कि स्वच्छ मांस को अगली खाद्य क्रांति होना चाहिए

सेलुलर कृषि पशुहिंसा रहित एवं बहुत कम संसाधनों का उपयोग कर प्रामाणिक मांस का उत्पादन करने के लिए प्रभावी तरीका प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में, पोल्ट्री और पोर्क जैसे मांस का उत्पादन भी पशु-कोशिकाओं से होता है। यह वास्तविक मांस और ऊतक मांस ही होते हैं लेकिन इनमें वर्तमान मांस उत्पादन के साथ जुड़ी समस्याएँ शामिल नहीं होती।

न केवल स्वच्छ मांस पूर्णतः पशु-वध रहित है; बल्कि यह फैक्ट्री-फार्मों पर खाद्य-पशुपालन के हानिकारक पर्यावरणीय प्रभावों को भी समाप्त करता है। जहाँ लगभग 71 प्रतिशत भारतीय मांसाहार करते हैं , स्वच्छमांस खेल को काफी हद तक बदल सकता है।

एक बात और, पशु-कृषि जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारक है। वास्तव में, संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार, वैश्विक मानव प्रेरित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का पंद्रह प्रतिशत सिर्फ खाद्य-पशुपालन द्वारा होता है। अनाज उत्पादन के मुकाबले प्रति कैलोरी मुर्गा उत्पादन में 25 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होता है।

इस पर भी तुर्रा यह कि वनस्पति-आधारित भोजन की तुलना में मांस-उत्पादन में काफी अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए,1 किलो बकरे के मांस के उत्पादन के लिए 8,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, और महज 1 किलो मुर्गे के मांस के उप्तादन के लिए कुल 4000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। ओह..! कितना बेकार है ना ?!

स्वच्छ मांस, पर्यावरण की मदद के साथ-साथ अनगिनत जानवरों को फैक्ट्री फार्मों के दुःखमय जीवन से बचाएगा। फैक्ट्री फार्मों पर गायों, सूअरों और मुर्गियों से एक बेजान वस्तुओं की तरह निष्ठुर व्यवहार किया जाता है, और उनके छोटे से जीवन को गहन कारावास, पीड़ादायक अंगभंग, और हिंसक मौतों जैसे अकल्पनीय क्रूरता से भर दिया जाता है।

लेकिन आपको पशुओं और पर्यावरण की रक्षा के लिए स्वच्छ मांस का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। यहाँ तक ​​कि कट्टर से कट्टर मांसाहारियों को संतुष्ट करने के लिए भी अनेक स्वादिष्ट निरामिष विकल्प मौजूद हैं। शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए। 
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